लगी है चोट जख्मों का ख्याल आता है
लगी है चोट जख्मों का
ख्याल आता है,
और को क्या कहें खुद
पै मलाल आता है,
अपने और बेगाने की
पहचान क्या है,
यह हर बार उलझ कर
सवाल आता है।।1।।
यह दुनियां क्या जिसे
कहते हैं दुनियां,
नहीं यह समझ में मेरी
जंजाल आता है।।2।।
जिसे कुछ लोग कहते हे पैगम्बर,
मेरी नजरों में मुकम्मल
दलाल आता है।।3।।
जैसी करनी है प्रेमी
वैसी ही भरनी पड़ेगी,
बन के प्रारब्ध अपना
ही ऐमाल आता है।।4।।










