कुल की परम्परा मर्यादा,निभाये जाना बेटी।

0
236

कुल की परम्परा मर्यादा,निभाये जाना बेटी।

कुल की परम्परा मर्याद,
निभाये जाना बेटी।
अब सास श्वसुर घर जाओ,
मत रोओ और रूलाओ।
अपने बचपन का संसार
भुलाये जाना बेटी। कुल की०१

सब काम समय पर करना
चीजें जहाँ की तहाँ धरना।
सबको उत्तम-भोजन
परसि जिमाये जाना बेटी।
कुल की०२ जो दें प्रभु सम्पत्ति
भारी, तो भूल न जाना प्यारी।
अपने देश धर्म हित दान,
दिलाये जाना बेटी। कुल की०३

घर में आ जाय गरीबी
तो धर्म न तजना बीबी ।
टोटे में साहस से काम चलाये
जाना बेटी।
कुल की०४ मत फैशन में
फँस जाना, मत फूहड़पन दरसाना।
उत्तम गृहणी का श्रृंगार सजाये
जाना बेटी। कुल की०५

ये शिक्षा सार बताया,
सुख होगा अगर निभाया।
सबको कवि ‘शीतल’ के
गीत सुनाये जाना बेटी। कुल की०६