कुछ लोग जमाने में ऐसे भी होते हैं
कुछ लोग जमाने में,
ऐसे भी होते हैं,
जो अपनी किश्ती को,
धारा में डुबोते हैं।
कुछ कह भी नहीं सकते,
चुप रह भी नहीं सकते,
महफिल में हँसते हैं,
तन्हाई में रोते हैं।।1 ||
कोई उनके लिये मरे,
जिये चाहे दुख भरे,
वह अपने बिस्तर पर
आराम से सोते है।।2।।
औरों को समझाायें,
खुद अमल में ना लायें,
वह अपनी राहों में
काटे ही बोते हैं। ।3।।
वैभव धन वाले तन
उजले मन काले,
प्रेमी सब कुछ पाकर,
वह सब कुछ खोते हैं।।4।।










