Arya Samaj Event क्षण भंगुर जीवन की कलिका। By Arya Samaj - April 21, 2025 0 242 FacebookTwitterPinterestWhatsApp क्षण भंगुर जीवन की कलिका। क्षण भंगुर जीवन की कलिका।कल प्रातः को जाने, खिली न खिली।।मलयाचल की शुचि शीतल,मन्द सुगन्ध समीर, चली न चली।। कर काल कुठार लिए फिरता,तन नम्र से चोट, झिली न झिली ।।जपले प्रभु नाम अरी रसना,फिर अन्त समय में, हिली न हिली। Curent posts: कण-कण में जो रमा है हे प्रभु हम तुमसे वर पावे तू कर बन्दगी और,भजन धीरे-धीरे। आर्यों की सन्तान,डरना क्या जानें । आनन्द स्त्रोत बह रहा करले यतन हजार,पंछी उड़ जाना। आत्मा अपनी अमर,अग्नि जला सकती नहीं। एक डाल के हम हैं पंछी विश्वासों के दीप जलाकर युग ने तुम्हें पुकारा। तुम इतने महान् बन आए।