कितना भी डालियगा हजरत नकाब को।।

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कितना भी डालियगा हजरत नकाब को।।

कितना भी डालियगा
हजरत नकाब को।।
चेहरा बता ही देगा
दिल की किताब को।।


भीतर की सब हकीकत
आंखें बतायेंगी।
छुपती नही छुपाये
होठो पे आयेंगी।।
पाकीजगी से रखना
अन्दर जंनाव को।। १ ।।

जैसी है सोच तेरी दुनियां
का रंग वैसा तेरा मकान जैसा
सारा जहान तैसा सुरेन्द्र बुझा
न देना मन के चिंराग को।। २।।

उजले ये बाल कहते पचपन
के हो गये हो उजले ही काम
करना पचपन के हो गये हो
हरगिज ना अब लगाना
सिर पें खिजाब को ।।३।।