किस्मत से मिला है मानुष तन

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किस्मत से मिला है मानुष तन (तर्ज – इस दिल के टुकड़े हजार हुए)

किस्मत से मिला है,मानुष तन,
कोई डूब गया, कोई तार गया।
कोर्ड कर्मा वाला खट रिआ,
कोई पिछली कमाई उजाड़ गया।

पशु पक्षी कीटाणु बन-बनकर,
ए मानुष चोला पाया था।
विषयों में फंस मति मन्द हुए,
न विवेक रहा न विचार रहा।
कि०….

एह मानुष जन्म अमोलक है,
कोई विरला लाभ उठाता है,
जो इन्द्रियों का दमन किया,
वो भवसागर से पार हुआ।
कि…….

सत्य विद्या का प्रकाश हुआ,
जिस प्राणी के मन मन्दिर में,
सब उसकी दूरी दूर हुई,
उसे भगवन का दीदार हुआ।
कि०……