किस ढङ्ग से सुनाऊँ

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किस ढङ्ग से सुनाऊँ

किस ढङ्ग से सुनाऊँ
किस रङ्ग में सुनाऊँ
सत्संग में सुनाऊँ सबको
महिमा ओ३म् नाम की

कुछ ध्यान लगा ले
थोड़ा ज्ञान को पा ले
चर्चा कर के ओ३म् नाम की
किस ढङ्ग से सुनाऊँ
किस रङ्ग में सुनाऊँ
सत्संग में सुनाऊँ सबको
महिमा ओ३म् नाम की

गोरा चाहे काला
चाहे निर्धन धनवाला
जो ध्याये ओ३म् नाम को
बड़ा वो किस्मत वाला
ध्यान में जो खो जाये
प्रभु का जो हो जाये
चिन्ता किस बात की
किस ढङ्ग से सुनाऊँ
किस रङ्ग में सुनाऊँ
सत्संग में सुनाऊँ सबको
महिमा ओ३म् नाम की

सारी विपदा को हरता
प्रभु सबका कर्ता-धर्ता
कर्म जिसने किया जैसा
उसे वैसा ही फल मिलता
प्रभु है वीर दयाला
वही सबका रखवाला
फिर चिन्ता किस बात की
किस ढङ्ग से सुनाऊँ
किस रङ्ग में सुनाऊँ
सत्संग में सुनाऊँ सबको
महिमा ओ३म् नाम की

सजी है फूलों से क्यारी
चली है पवन निराली
देख “कृष्ण” उसकी रचना
सीप में मोती भी डाली
“रीना” करे प्रभु तेरा सुमिरन
छोड़ माया का बन्धन
जिन्दगी ओ३म् के नाम की
किस ढङ्ग से सुनाऊँ
किस रङ्ग में सुनाऊँ
सत्संग में सुनाऊँ सबको
महिमा ओ३म् नाम की

रचना :- श्री कृष्ण जी व रीना जी
स्वर :- अज्ञात