कौन रंग धरम का,कौन रंग करम’ का।
कौन रंग धरम का,
कौन रंग करम’ का।
कौन रंग आत्मा का,
समझ ले रे भैया… हो ऽ जी ।।
निर्मल रंग धरम का,
पवित्र रंग करम का।
दिव्य रंग आत्मा का,
रे मोरे भैया… हो ऽ जी।।
कित बसे धरमवा,
कित बसे करनवा ।
कित बसे आत्मा
समझ ले रे भैया… हो ऽ जी।।
जीवन बासे धरमवा,
समय बासे करमवा ।
ब्रह्म बासे आत्मा,
रे मोरे भैया… हो ऽ जी ।।
कित सोहे धरमवा,
कित सोहे करमवा ।
कित सोहे आत्मा,
समझ ले रे भैया… हो ऽ जी।।
बुद्धि सोहे धरमवा,
मन सोहे करमवा।
अव्यक्त सोहे आत्मा,
रे मोरे भैया… हो ऽ जी ।।










