कर ले भला, होगा भला, अन्त भला है
कर ले भला, होगा भला, अन्त भला है
बस यही संसार में जीने की कला है
पाप जिसने कभी ना किया है
दीन दुखियों को जीवन दिया है
उसका हरा बाग सदा फूला फला है
बस यही संसार में जीने की कला है
उस पिता शरण में जो आया
ईश भक्ति में मन को लगाया
क्रोध की अग्नि में कभी जो न जला है
बस यही संसार में जीने की कला है
शोक-सिन्धु से चाहो जो करना
भूल कर भी बुरा कुछ न करना
मान लो इसको बड़ी “बेमोल” सलाह है
बस यही संसार में जीने की कला है
कर ले भला, होगा भला, अन्त भला है
बस यही संसार में जीने की कला है










