कर गये देश का बेड़ा पार

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कर गये देश का बेड़ा पार

कर गये देश का बेड़ा पार,
टंकारे वाले स्वामी ।।
सत्यार्थ प्रकाश बनाया,
काशी को जाय हिलाया।
आया जीत न मानी हार,
टंकारे वाले स्वामी ।।

जो थे राम कृष्ण के प्यारे,
हो रहे थे हमसे न्यारे।
कर के शुद्धि लिये सुधार,
टंकारे वाले स्वामी ।।

नारी का मान बढ़ाया,
शिक्षा अधिकार दिलाया।
बतलाया वेदों का सार,
टंकारे वाले स्वामी ।।

खुलवायी फिर गौशाला,
विधवाओं का दुख टाला।
पाला दलितों का परिवार,
टंकारे वाले स्वामी ।।

वेदों की बीन बजाई,
ईश्वर से प्रीत सिखाई
आयी अब नरदेव बहार,
टंकारे वाले स्वामी ।।