कर चले हम फिदां जानो तन साथियो

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कर चले हम फिदां जानो तन साथियो

कर चले हम फिदां जानो
तन साथियो,
अब तुम्हारे हवाले
वतन साथियो।

खींच दो अपने खूं से जमीं पर लकीर,
इस तरफ आने पाए न रावण कोई।
तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे,
छूने पाये न सीता का दामन कोई।
राम हो तुम तुम्हीं लक्ष्मण साथियो,
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो।

सांस थमती गयी,
नब्ज जमती गयी,
फिर भी बढ़ते कदमों को
न रुकने दिया।
कट गए सर हमारे तो
कुछ गम नहीं,
सर हिमालय का हमने न
झुकने दिया।
मरते-मरते रहा बांकापन साथियो,
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो।

जिन्दा रहने के मौसम बहुत हैं मगर,
जान देने की रुत रोज आती नहीं।
हुश्न और इश्क दोनों को रुसवा करे,
वह जवानी जो खूं में नहाती नहीं।
आज धरती बनी है दुल्हन साथियो,
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो।

राह कुर्बानियों की न बौरान हो,
तुम सजाते ही रहना नए काफिले।
फतह का जश्न इस जश्न के बाद है,
जिन्दगी मौत से मिल रही है गले।
बांध लो अपने सर पे कफन साथियो,
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो।