काम बिगड़े हुए सब सुधर जायेंगे !

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काम बिगड़े हुए सब सुधर जायेंगे !

काम बिगड़े हुए सब सुधर जायेंगे !
पर अविद्या का परदा उठा दीजिए। (1)

खा रही है तुम्हें घुन की मानिन्द जो।
उन बुराईयों की हस्ती मिटा दीजिए ।।
पर अविद्या का पर्दा…….।।2।।

देश के नौजवाँ सो रहे हैं अभी।
जागिये और उनको बता दीजिये ।।
पर अविद्या का पर्दा …….।।3।।

अपने बच्चों को शिक्षा भी दो धर्म की।
धर्म पर उनको चलना सिखा दीजिए।।
पर अविद्या का पर्दा…….।।4।।

जिन्दगी कौम की चाहते हो अगर।
तो छुआछूत का गढ़ गिरा दीजिए।।
पर अविद्या का प……..।।5।।

एक हो जाओ मिल करके छोटे बड़े।
देश में प्रेम-गंगा बहा दीजिए ।।
पर अविद्या का पर्दा……..।।6।।

जो तुम्हारा हैं उनको जुदा मत करो।
गैर आये तो अपना बना लीजिए।।
पर अविद्या का पर्दा ……. ।।7।।

लाज गर ‘मुसाफिर’ दयानन्द की।
नाद वेदों का घर-घर बजा दीजिए।।
पर अविद्या का पर्दा…….।।8।।