कैसी भारी भूल हुई थी क्या दिलों में ठान लिया।

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पत्थर का ईश्वर

(तर्ज-चाँदी की दीवार न तोड़ी प्यार भरा दिल तोड़ दिया)

कैसी भारी भूल हुई थी क्या दिलों में ठान लिया।
जब इस देश के लोगों ने पत्थर को ईश्वर मान लिया।
कैसी भारी भूल हुई थी……..

१. जड़ पूजा ने ही भारत का गौरव मान घटाया है।
वेद का पढ़ना और पढ़ाना बिलकुल ही छुड़वाया है।
बल बुद्धि और ज्ञान का इसने कर दिया आज सफ़ाया है।
खाना पीना मौज उड़ाना जीवन का फल जान लिया।
जब इस देश के लोगों ने पत्थर को ईश्वर मान लिया।
कैसी भारी भूल हुई थी……….

२. क्यों आकर महमूद ग़ज़नवी मन्दिर तोड़ गिरा देता।
लूट के लाखों हीरे मोती देश अपने पहुँचा देता।
कृष्ण सा होता वीर कोई तो पुरज़े उसके उड़ा देता ।
मूर्तियों में ध्यान लगाकर ख़ुद ही कर नुकसान लिया।
जब इस देश के लोगों ने पत्थर को ईश्वर मान लिया।
कैसी भारी भूल हुई थी……..

३. जब से चली यह मूर्ति पूजा दम्भ ने डाला डेरा है।
घर घर में पाखण्ड अविद्या छाया घोर अन्धेरा है।
पापों की काली रातों ने जीवन का दिन घेरा है।
पूँजी सुख की छोड़ के दुःख का ढूँढ ‘पथिक’ सामान लिया।
जब इस देश के लोगों ने पत्थर को ईश्वर मान लिया।
कैसी भारी भूल हुई थी…………