कैसी भारी भूल हुई थी
कैसी भारी भूल हुई थी
क्या दिलों में ठान लिया।
जब इस देश के लोगों ने
पत्थर को ईश्वर जान लिया।।
१. जब से चली ये मूर्ति
पूजा गम ने डाला डेरा है।
घर-घर में पाखण्ड अविद्या
छाया घोर अन्धेरा है।
पापों की काली रातों ने
जीवन का दिया घेरा है।
मूर्तियों में ध्यान लगाकर
जीवन का सुख जान लिया…
२. क्या आकर महमूद गजनवी
मन्दिर तोड़ गिरा देता।
लूट के सारे हीरे मोती देश
अपने पहुँचा देता।
कृष्ण सा होता वीर कोई
तो पुरजे उसके उड़ा देता।
अन्धविश्वास में ही फंसकर
जीवन का सुख जान लिया…
३. जड़ पूजा ने ही भारत
का गौरव मान घटाया है।
वेद का पढ़ना और पढ़ाना
इसने ही छुड़वाया है।
बल बुद्धि और ज्ञान का
जिसने कर दिया
आज सफाया है।
खाना पीना मौज उड़ाना
जीवन का सुख जान लिया…










