कभी कोई आये यहाँ

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कभी कोई आये यहाँ

कभी कोई आये यहां
कभी कोई जाये रे।
जीव है मुसाफिर और
जग है सराये रे।
दिल क्यूं लगाये…….

जिसने भी आके
यहां झण्डे हैं गाड़े।
मौत ने उसके
पांव है उखाड़े।
नामों निशान तक
भी नजर ना आये रे।

इतनी है प्यारे तेरी
जीवन कहानी।
बचपन सबेरा दोपहर
है जवानी।
शाम है बुढ़ापा मानो
ढलता ही जाये रे।

दादा का मकान बना
पोता निगहवान है
ये भी तो बेचारा चन्द
रोज का मेहमान है
पोते का भी पोता
आके मालिक कहाये रे।

उसका ही नाम आज
दुनियां में छाया है।
नेकी का महल जिस
जिस ने बनाया है।
नत्था सिंह उसके ही
जहां गुण गाये रे।