कभी इसका आना-जाना किसी ने न जाना।

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कभी इसका आना-जाना किसी ने न जाना।

कभी इसका आना-जाना किसी ने न जाना।

कभी इसका आना-जाना किसी ने न जाना।
कहाँ का निवासी है यह, कहाँ है ठिकाना।
किसी को भी कोई अपना पता न बताए।।1।।
कहाँ लौट जाए। गति जीव……

मिली एक नगरी इसको अयोध्या निराली।
जो है आठ चक्रों और नौ द्वारों वाली।
सिर्फ चार दिन ही इसका बादशाह कहाए।।2।।
कहाँ लौट जाए। गति जीव….

प्रभु ने हज़ारों तोहफे बनाकर दिए हैं।
कुदरती नज़ारे जग में इसी के लिए हैं।
इन्हें छोड़ क्यों जाता है समझ में न आए।।3।।
कहाँ लौट जाए। गति जीव……

‘पथिक’ यह प्रभु की माया प्रभु जानता है।
प्रभु के सिवा न कोई पहचानता है।
जो महान् शक्ति सारे विश्व को चलाए।।4।।
कहाँ लौट जाए। गति जीव……