जो ज़िन्दगी पुरुषार्थ के साँचे में ढली है।

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पुरुषार्थी बनो

(तर्ज-तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा…)

जो ज़िन्दगी पुरुषार्थ के साँचे में ढली है।
तूफान का मुँह मोड़ के रख दे वो बली है।

१. संसार में जीना तो बड़ी शान से जीना।
इज़्ज़त से बड़े प्यार व सम्मान से जीना।
लेकिन किसी भी हाल में मन्जूर न करना।
नज़रें झुका के शर्म से अपमान से जीना।
अपमानजनक ज़िन्दगी से मौत भली है। तूफान का……

२. आराम तो हराम है आराम न करना।
इनसान के चोले को यूँ बदनाम न करना।
करना सदा वो काम जिसमें सर रहे ऊँचा।
झुकता हो जिसमें सर कभी वो काम न करना।
मेहनत ही इस जहान में फूली व फली है। तूफ़ान का……

३. कुम्भकरण व रावण बड़ा अभिमान था जिन को।
और कंस दुर्योधन भला अच्छे लगे किन को।
तब राम भरत कृष्ण व अर्जुन भी हुए थे।
क्या बात है सत्कार व पूजा मिली इन को।
जग में चरित्रवान की महिमा ही चली है। तूफान क

४. हर वक्त जो परमात्मा को याद करेगा।
दुनियाँ में किसी ख़ौफ़ से हरगिज़ न डरेगा।
घबरा के संकटों से कभी डोल न जाना।
संकटहरण प्रभु स्वयं संकट को हरेगा।
कब संकटों की ‘पथिक’ वहाँ दाल गली है। तूफान का…….