जो होली सो होली भुला दो उसे
जो होली सो होली
भुला दो उसे,
आज मिलने मिलाने
का त्यौहार है।
त्याग दो छल कपट
द्वेष की भावना,
प्रेम गंगा बहाने का
त्यौहार है।
न कीचड़ उठालो
न गाली बको,
यह कुप्रथा बन्द
करने में आनन्द है।
स्वर्ग सम शुद्ध
वातावरण हो यहां,
आज होली मनाने
का त्यौहार है।
ये हीरे से बढ़कर है
इन्सान का तन,
व्यर्थ में ना गंवाना
जरा ध्यान दो।
बांट दो ज्ञान गीता
का श्रीकृष्ण सम,
प्रेमबन्सी बजाने
का त्यौहार है।
लोग श्रद्धा से जिसको
करे अनुकरण,
ऐसा आदर्श जीवन
बनाओ सभी।
पाप अन्याय उत्पात
बढ़ने न दें,
मिघ्न संकट मिटाने
का त्यौहार है।।
कर रहे जो अनाचार
पीकर यहां,
ये अहंकार मदिरा
भरी प्यालियां।
ये सफल होगी
होली तभी बन्धुओं,
वेदाऽमृत पिलाने
का त्यौहार है।
ये विरह ये मिलन
काव्य श्रृंगार रस, गीत
भद्दे व गन्दे सुनाई न दें।
डाल दें जो कि मुद्दों
में भी जान को,
गीत ऐसे सुनाने
का त्यौहार है।
सभी मनुष्यों में हो
प्रेम वातावरण,
हे सभी भाई-भाई
न झूठा कथन।
‘राघव’ हो संगठित करे हृदय मिलन,
जीवन ज्योति जगाने का त्यौहार है।।










