जो घर,घर ही हो वह
जो घर,घर ही हो वह
दूसरो के लिये आदर्श होता है
जहाँ हरेक जीवन मर्यादित हो
कितना अच्छा लगता है
जहाँ नारी का सम्मान हो
जहाँ भाई भाई में प्यार
जहाँ मां बाप की सेवा हो
कितना अच्छा लगता है
जहाँ सास,बहू को बेटी माने
बहू सास को मां
गली मोहल्ले में जिनकी प्रशंसा
कितना अच्छा लगता है
जहाँ सबके चेहरों पर मुस्कराहट
उत्साह भरा जीवन हो
सब अपने अपने कर्तव्यो में
कितना अच्छा लगता है
जहाँ पति पत्नी में प्यार हो
आदर्श दम्पति का रुप हो
बच्चों में अच्छे संस्कार हो
कितना अच्छा लगता है
जहाँ बडो के प्रति आदर हो
प्रात: उठते ही अभिवादन हो
अतिथि सत्कार में नाम हो
कितना अच्छा लगता है
घर की बातें घर में ही रहे
बाहर नही जाने पाये
मिलजुल मतभेद मिटाये
कितना अच्छा लगता है
जहाँ छल-कपट से मुक्त जीवन
एक दूजे को प्यार हो
ये सब बातें हर घर मेंं हो










