जीवन में, जीवन में, किया नहीं

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जीवन में, जीवन में, किया नहीं

तर्ज – परदेसी परदेसी जाना नहीं……

जीवन में, जीवन में, किया नहीं
जाप ओ३म् का, जाप
ओ३म् का प्रभु को भुलाके,
दुनियाँ में आके कुछ भी ना पाया,
ये उम्र गँवाके जीवन में……

कष्ट सभी दुखियों के वो ही हरता है
जीवन में हम सबके खुशियाँ भरता है
पालन सब जीवों का वो ही करता है
ओ३म् उपासक “सचिन” उसी से डरता है
प्रभु को भुला के……

सब नामों में नाम प्रभु का प्यारा है
उस दाता का प्यार भी सबसे न्यारा है
ईश्वर की भक्ति ही एक सहारा है
उसका ही जग में फैला उजियारा है
प्रभु को भुला के……..

सबका पिता हमारा सबकी माता है
सबका पालन हार वही सुख दाता है
दुनियाँ के हर जीव से उसका नाता है
सब जीवों के मन को वो ही भाता है
प्रभु को भुला के……