जिसके लगे वही जाने है यह बेटे वाली चोट।
जिसके लगे वही जाने है,
यह बेटे वाली चोट।
कृष्ण बेटे वाली चोट,
दर्द भरा सारे गात में।। टेक ।।
सारी दुनिया जिक्र करै है,
जिस माता का पूत्र मरे है।
जीवन भर ना घाव भरै है,
घणी कुढ़ाली चोट ।।
कृष्ण घणी कुढ़ाली चोट, दर्द भरा…..
कुटुम्ब सारा खप गया रंजस में,
दुखियारी का मन नहीं बस में।
कच्चा फोड़ा है नस में,
ना जाये सम्भाली चोट।
कृष्ण ना जाय सम्भाली चोट,
दर्द भरा…….।।2।।
पुत्रों वाली नपुत्ति करी,
ममता मयी मात यूँ मरी।
एक चोट ना भरी चोट पै
फिर दे डाली चोट ।।
कृष्ण ना जाय सम्भाली चोट,
दर्द भरा।।3।।
आपस की गड़बड़ में,
इकले रह गये घर उज्जड़ मे।
प्रेमी अपने पेड़ की जड़ में,
जड़ गया माली चोट।
कृष्ण जड़ गया माली चोट,
दर्द भरा सारे गात में।।4।।










