जन्म दिया और काया बदली
जन्म दिया और काया बदली
सुख की प्रभु ने छाया कर दी …
जिसे बनाया सुख का साथी
दुःख आया तो टूटा नाता
मेरे साथ रहा प्रभु साथी कृपा हुई
तत्काल ….दयानिधे
बिन माँगे भण्डार दिया है
क्यूँ कर तेरा प्रेम न माँगा
इन होंठों को ओ३म् का स्वर दे
स्वरमय कर चित्त प्राण ….दयानिधे ….
छोड़ दूँ कैसे आँचल तेरा
तेरे सिवा प्रभु कौन है मेरा
तेरी दया की कोई ना सीमा
ना है कोई मिसाल …दयानिधे
तर्ज :- गोड तुझ्या त्या स्वप्ना मधुनी
रचनाकार :- पूज्य श्री ललित मोहन साहनी जी – मुम्बई
स्वर :- श्रीमती अदिति शेठ जी










