ईश्वर को निज नाम ओ३म् प्यारा है।

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ईश्वर को निज नाम ओ३म् प्यारा है।

ईश्वर को निज नाम
ओ३म् प्यारा है।
प्राणियों के जीवन
का वही सहारा है।।

अकार उकार मकार से
बनता है प्यारा ओ३म् ।
सत् चित् आनन्द कह
कर के पुकारा है।।1।।

अकार से विराट अग्नि
और विश्वादि।
नामों का वाचक ग्राहक
सबने स्वीकारा है।।2।।

उकार से हिरण्यगर्भ
वायु तेजसः आदि।
हर वस्तु में व्यापक
हर वस्तु से न्यारा है।।3।।

मकार से ईश्वर आदित्य
और प्राज्ञ आदि।
‘प्रेमी’ सृष्टि रचयिता
पालक और संहारा है।। 4 ||