ईश हमें देते हैं सब कुछ

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ईश हमें देते हैं सब कुछ

ईश हमें देते हैं सब कुछ,
हम भी तो कुछ देना सीखें।
जो कुछ हमें मिला है प्रभु से,
वितरण उसका करना सीखें ॥

हवा प्रकाश हमें मिलता है,
और मिलता मेघों से पानी,
इसके बदले कुछ नहीं देते,
इसको कहते हैं बेईमानी,
इसीलिए दुख भोग रहे हैं,
दुख को दूर भगाना सीखें ॥
ईश……

तपती धरती पर पथिकों को,
पेड़ सदा देता है छाया,
अपना फल तो स्वयं न खाकर,
जीवन उसने सफल बनाया,
दसवां पहले प्रभु को देकर,
बाकी स्वयं बरतना सीखें ॥
ईश……..

सुरदुर्लभ मानव तन पाकर,
इसको मल से रहित बनाएं,
खिले फूल खुशबू देते हैं,
वैसे ही हम भी बन जाएं,
तप सेवा सिमरन से जीवन,
प्रभु को अर्पित करना सीखें ॥
ईश……..

असत् नहीं यह प्रभुमय दुनिया,
और नहीं है यह दुखदाई,
दिल दिमाग को सही दिशा दे,
तो बन सकती यह सुखदाई,
जन को प्रभु देते सब कुछ,
जन भी तो कुछ देना सीखें ॥

खाया हुआ अपना नहीं होता, अपितु पचाया हुआ अपना होता है। ऐसे ही कमाया हुआ धन अपना नहीं होता, अपितु परोपकार में लगाया हुआ धन अपना होता है।