हो ‘असत् से दूर भगवन्

0
16

हो ‘असत् से दूर भगवन्

हो ‘असत् से दूर भगवन्,
सत्य का वरदान दो।’
दूरकर द्रुततिमिर भगवन्
शुभ्र ज्योति विहान दो ॥

मृत्यु बन्धन को हटा,
अमरत्व हे भगवान् दो।
प्रकृति पाशों से छुड़ा
आनन्द मधु का पान दो ॥