हे प्रभो ! आनन्ददाता !! ज्ञान हमको दीजिये

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हे प्रभो ! आनन्ददाता !! ज्ञान हमको दीजिये

हे प्रभो ! आनन्ददाता !!
ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को,
दूर हमसे कीजिये

लीजिये हमको शरण में,
हम सदाचारी बनें
ब्रह्मचारी धर्मरक्षक
वीर व्रतधारी बनें
हे प्रभु ! आनन्ददाता !!

हे प्रभो ! जग के पिता
तुम से हमारी प्रार्थना
हम बालकों को बुद्धि
ऐसी दो यही है याचना
सर्वेश और सर्वज्ञ तुम को
सर्वव्यापक जान लें
माता-पिता गुरु आदि की
सेवा सदा मन बान्ध लें
हे प्रभु ! आनन्ददाता !!

प्रेम से हम गुरुजनों की
नित्य ही सेवा करें
सत्य बोलें – झूठ त्यागें
मेल आपस में करें
निन्दा किसी की हम किसी से
भूल कर भी ना करें
दिव्य जीवन हो हमारा
तेरे यश गाया करें
हे प्रभु ! आनन्ददाता !!

जीत आलस्य को सदा
निज कार्य में अनुरुक्त हो
धर्मच्युत होवें कभी ना
सर्व के हम मित्र हों
ब्रह्म-मुहूर्त में उठें
करें सदा सब ध्यान हम
तू है हम को देखता
रखें ये निशदिन ध्यान हम
हे प्रभु ! आनन्ददाता !!
ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को,
दूर हमसे कीजिये
लीजिये हमको शरण में,
हम सदाचारी बनें
ब्रह्मचारी धर्मरक्षक
वीर व्रतधारी बनें
हे प्रभु ! आनन्ददाता !!
ज्ञान हमको दीजिये
ज्ञान हमको दीजिये
ज्ञान हमको दीजिये
ज्ञान हमको दीजिये

योग विद्या, ब्रह्म विद्या,
हो अधिक प्यारी हमें,
ब्रह्म निष्ठा प्राप्त कर के
सर्व हितकारी बनें

जाये हमारी आयु हे प्रभु !
लोक के उपकार में
हाथ डाले हम कभी ना
भूल कर अपकार में
हे प्रभु ! आनन्ददाता !!
ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को,
दूर हमसे कीजिये

मातृभूमि – मातृसेवा
हो अधिक प्यारी हमें
देश में सेवा मिले
निज देश हितकारी बनें
हे प्रभु ! आनन्ददाता !!
ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को,
दूर हमसे कीजिये

कीजिये हम पर कृपा
ऐसी हे परमात्मा !!!
मोह मद मत्सर रहित
होवे हमारी आत्मा
हे प्रभु ! आनन्ददाता !!
ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को,
दूर हमसे कीजिये

हे प्रभु ! आनन्ददाता !!
ज्ञान हमको दीजिये
शीघ्र सारे दुर्गुणों को,
दूर हमसे कीजिये