ईश महिमा
हे जगदीश्वर हे भगवान! बहुत निराली तेरी शान ।
विश्वविधाता ईश महान् ! बहुत निराली तेरी शान।।
अमर अनादि अनन्त अनूपा, नित्य सनातन सत्य स्वरूपा।
अखल निरंजन शक्तिमान, बहुत निराली तेरी शान।।
मात-पिता, बन्धु और भ्राता।
रक्षक, पालक तू सुखदाता।
तू सबका प्राणों का प्राण।
बहुत निराली तेरी शान……..
मंगल-जनक अमंगल हारी।
कष्ट-विदारक पर-उपकारी।
दीन-दयाकर कृपानिधान।
बहुत निराली तेरी शान……….
पतित सुपावन शंकर स्वामी,
परम सहायक अन्तर्यामी।
‘पथिक’ करे तेरा गुणगान,
बहुत निराली तेरी शान…….










