हर बात को तुम भूलो भले

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हर बात को तुम भूलो भले

हर बात को तुम भूलो भले,
माँ बाप को तुम मत भूलना।
उपकार इनके लाखों हैं
इस बात को तुम मत भूलना॥

हर चीज मिले इस दुनियाँ में
माँ-बाप नहीं मिल पाते हैं।
माँ-बाप की सेवा जो करते,
सन्तान की सेवा पाते हैं।
जैसी करणी वैसी भरणी,
इस न्याय को तुम मत भूलना….।

धरती पर देवों को पूजा,
भगवान् को लाख मनाया है।
तब तेरी सूरत पाई है,
संसार में तुझको बुलाया है ॥
इन पावन लोगों के दिल को,
पत्थर बनकर मत तोड़ना….।

अपने ही पेट को काटा है
और तेरी काया बनाई है।
अपना हर कौर खिलाया तुझे,
तब तेरी भूख मिटाई है ॥
इन अमृत देने वालों के
जीवन में जहर मत घोलना…।

जो चीज भी तूने मांगी है,
उस चीज को तूने पाया है।
हर जिद को लगाया सीने से,
बड़ा लेह तुझसे लगाया है।
इन प्यार लुटाने वालों का
तुम प्यार कभी मत भूलना….।

चाहे लाख कमाई धन-दौलत,
ये बंगला कोठी बनाई है।
माँ-बाप ही नाखुश हैं तेरे,
बेकार ये सारी कमाई है।
ये लाख नहीं ये खाक हैं सब,
इस राज को तुम मत भूलना….।

गीले में सदा ही सोए हैं,
सूखे में तुझको सुलाया है।
बाहों का बनाकर के झूला,
तुझे दिन और रात झुलाया है।
इन निर्मल-निश्छल आँखों में
इक आंसू भी मत घोलना…।

पलकों पे बिठाया है तुझको,
तुझे हरदम रखा पनाहों में।
कलियों का कर बिछौना तेरा,
फूलों को बिछाया राहों में।
इन प्यारे लोगों की राहों में,
तू काँटे मत छोड़ना….।

घर गाड़ी और व्यापार मिले,
अनमोल रत्क्त मिल जायेंगे।
हर चीज मिलेगी दौलत से,
माँ-बाप न मिलने पायेंगे।
भगवान् से भी पावन हैं जो,
इन चरणों को मत भूलना….।