है परम पवित्र जनेऊ
है परम पवित्र जनेऊ,
है ऊंचा चरित्र जनेऊ।
है धर्म का मित्र जनेऊ,
इसे तू अपनाइए मेरे भैया।
मत ‘बदलूराम’ तुम भूलो,
नास्तिकता पर मत ठूलो।
तुम शरण ऋऋषि की हो लो,
अगर कुछ सरमाइए मेरे भैया।
ब्राह्मण का मान जनेऊ,
क्षत्री की शान जनेऊ।
है वैश्य का मान जनेऊ,
शूद्र तू भी अपनाइए मेरे भैया।
ऋण तीन उतारें कैसे,
दस सद्गुण धारें कैसे।
पांचों को मारें कैसे,
भेद ये समझाइए मेरे भैया।
सामने खड़ा हत्यारा,
है धर्म जान से प्यारा।
सिर पर धरा हो तेग दुधारा,
हकीकत कहलाइए मेरे भैया।
चोटी पे चढ़ा दो चोटी,
दो छोड़ आदतें खोटी।
मत समझो सभी कुछ रोटी,
पाप से घबराइए मेरे भैया।










