ज्ञान का सागर चार वेद, यह वाणी है भगवान की।

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ज्ञान का सागर चार वेद, यह वाणी है भगवान की।

ज्ञान का सागर चार वेद
यह वाणी है भगवान की।
इसी से मिलती सब सामग्री
जीवन के कल्याण की।
ज्ञान का सागर चार वेद यह वाणी …… 1

सब सच्ची विद्याएँ जग में,
प्रकट वेद से होती हैं।
यहीं से जाकर सब नदियाँ,
पृथ्वी का आँगन धोती है।
उसी को जीवन सार मिला,
जिसने इसकी पहचान की।
ज्ञान का सागर चार वेद यह वाणी ……2

सृष्टि एक अदालत है,
और न्यायाधीश विधाता है।
यहीं पे हर प्राणी,
अपने कर्मों का फल पाता है।
वेद के अन्दर सब रचना है,
विधि के अमर विधान की।
ज्ञान का सागर चार वेद यह वाणी …… 3

वेद का पढ़ना और पढ़ाना
परम धर्म कहलाता है।
सुनना और सुनाना भी
कर्त्तव्य बताया जाता है।
वेद ही असली दौलत है,
दुनियाँ के हर इन्सान की।
ज्ञान का सागर चार वेद यह वाणी ……4

धन्य-धन्य भारत भूमि,
जिस पर वेदों का गान हुआ।
वेद का अमृत पिया पिलाया,
तब यह देश महान् हुआ।
‘पथिक’ पुण्य भूमि है यह,
तो ऋषियों की सन्तान की।
ज्ञान का सागर चार वेद यह वाणी ……5