फिर पीछे पछताये

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फिर पीछे पछताये

तर्ज – हवा में उड़ता जाये मेरा लाल…..

फिर पीछे पछताये,
जब समय कीमती गुज़र गया रे
जब समय कीमती गुज़र गया
बन्दे फिर मैंन से नीर बहाये,
जब समय कीमती गुज़र गया रे
जब समय कीमती गुज़र गया बन्दे

समय मिला तो और लिखूंगा,
“सचिन” वेद की वाणी
लिखने का ना समय मिला तो,
दूंगा बोल जबानी-2 फिर पीछे……

कभी ना मानी बात वेद की,
करता था मनमानी कहते थे
जो बात ऋषि वो,
सारी झूठी जानी-2 फिर पीछे……

जीवन है अनमोल ये तेरा,
बड़े भाग्य से पाया रहा भटकता
जग उलझन में, हीरा जन्म गंवाया-2
फिर पीछे………

आये थे कुछ पल भी सुहाने,
गवाँ दिये वो सारे आस का
दीपक नजर ना आता,
छाये हैं अंधियारे-2 फिर पीछे………