प्रार्थना
एक तेरी दया का दान मिले, एक तेरा सहारा मिल जाये।
भवसागर में बहती मेरी, नैया को किनारा मिल जाये।।1।।
जीवन की टेढ़ी राहों में, चलकर न तुझको जान सका।
आशाओं की झोली भर जाये, इक तेरा द्वारा मिल जाए।।2।।
मैं दीन हूँ दीनदयाल है तू, अल्पज्ञ हूँ मैं सर्वज्ञ है तू।
अज्ञान का पर्दा हट जाये, तेरा उजियारा मिल जाये। ।।3।।
इस दुर्लभ अवसर को पाकर, कोई उत्तम कर्म कमा न सका।
अब दिल की तड़प ये कहती है, यही प्रीतम प्यारा मिल जाये। ।।4।।
अपने मुझको अपना ना सके, औरों को उलाहना क्यों कर दूं।
तू सर्वकरों का दाता है, वरदान तुम्हारा मिल जाये। ।।5।।
मैं नर हूँ तू, नारायण है, इतना तो भेद जरूरी है।
यदि शरण तेरी मैं पा न सका, नर तन तो दुबारा मिल जाये। ।।6।।
है विनती एक यही मेरी, यही एक निवेदन मेरा।
इस जन्म मरण के बंधन से, अब तो छुटकारा मिल जाये।।










