एक सुनो कहानी दिल दहलानी
एक सुनो कहानी दिल दहलानी,
जिसको सुनकर मन कुंठित हो
आंख बहायें पानी।। टे।।
बीधे जमीन कुल
एक गांव का छोटा किसान,
दो बेटे और एक बेटी तीन थी
घर में सन्तान,
लाडली माँ-बाप की
सुन्दर सुदेशा बालिका,
ऊंची शिक्षण संस्था की
बन गई स्नातिका,
देखकर अच्छा घराना
सुन्दर स्वस्थ्य जवान से,
सुदेश का ब्याह कर दिया
मां बाप ने बड़ी शान से,
दहेज जी भर कर दिया
घर सारा खाली कर दिया।
कन्या के लिय दांव पर
कुल हैसियत को धर दिया,
सुन्दर स्वस्थ्य सुयोग्य बेटी
और सब सामान घर का,
भेंट में देकर किया मां बाप ने
सम्मान वर का,
जिगर का टुकड़ा दिया।
जिसने घो क्या रखता कसर,
यह तो वह ही जानता है
जिसके एक बेटी भी घर,
होती है सयानी एक सुनों कहानी……
सपनों का संसार लेकर
सुदेशा गई ससुराल के
सास ससुर ने रख लिया
घर सारा माल संभाल के,
लालची लालच के अन्दर धंस गये,
पाप के पंजों में पापी फंस गये,
अच्छा और सज्जन घराना क्या हुआ,
हो गई जब तंग घृणित
सास के व्यवहार से,
बोली कि सम्बन्ध क्या है
मेरा इस संसार से,
हो गई ग्लानी एक सुनो कहानी…..।।1।।
सोचा फिर प्रारब्ध पर
विश्वास करके देखलूं,
सुलझ जाये उलझन कुछ
प्रयास करके देखलूं,
प्रतिक्षा करने पर इसको
एक अवसर मिल गया,
दिल का बुझाया हुआ।
गुल कुछ समय को खिल गया,
सच्चाई पतिदेव से
एकान्त में कहने लगी,
विप्त की मारी पै विप्ता
और भी ढहने लगी।
दौष लगाकर चारित्रिक
सुत मां ने विरूद्ध कर रखा था,
सूरत से भी नझरत थी
वह इतना क्रुद्ध कर रखा था,
देखते ही चाँटा मारा।
शब्द कुछ अश्लील बोला,
कालिमाओं से क्लंकित कर दिया
मानव का चौला,
पत्नि बन करके नागिन
तू छल से मुझे डसने आई,
दुश्चरित्र कुल्टा निर्भागिन
बल से मुझे कसने आई।
पति की यह बातें सुनकर
थर जीवन नैया डोली,
अपने को नियन्त्रित करके
कर जोड़ यू धीरे से बोली।










