धन खूब कमा आनन्द मना, पर ऐसा कोई अपराध न कर।

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धन खूब कमा आनन्द मना, पर ऐसा कोई अपराध न कर।

धन खूब कमा आनन्द मना,
पर ऐसा कोई अपराध न कर।
अपना घर-बार बनाने को,
औरों का घर बर्बाद न कर ।।1।।

करता यदि व्यापार अगर,
असली दे दे, न मिलावट कर।
ले उचित दाम जो बनते हो,
विरथा ही किसी से विवाद न कर।।2।।

अधिकारी बन अधिकार जमा,
रिश्वत का पैसा नहीं कमा।
निष्पक्ष न्याय की नीति बना,
और जुल्मों की इमदाद न कर।।3।।

नेता बन पाप कमावे ना,
भोली जनता बहकावे ना।
परमार्थ दिल को भावे ना,
तो स्वास्थ्य को भी याद न कर।।4।।

निर्बल, असहाय, गरीबों को,
ना सता दुःखी ‘लालमन’ लोगों को
‘कह’ आर्यभोग सब भोगों को,
यश कमा व्यर्थ प्रमाद न कर ।।5।।

अदीनाः स्याम शरदः शतम्
सौ वर्ष तक दीनता-रहित होके जीवें।