देश के रक्षक धर्म के पालक आ आ आ। (धुन-नील गगन में उड़ते पंक्षी)
देश के रक्षक धर्म के
पालक आ आ आ।
आज समय आया है
तेरी कठिन परीक्षा का।।
तुफानों के बीच में
फंसी देश की नैया।
इसको पार लगाने वाला
ना कोई पास खिवैया ।।
बन केवटिया देश की
नैया को उस पार लगा।
देख बाबरे बीच भंवर में
यह चकरा ना जा ।।1।।
वक्त पै होती है सदां
वीरों की पहचान।
देखें कौन लगायेगा आज
दांव पर जान।।
देश प्रेम की समां के
ऊपर लगा हुआ तांता।
हंसकर कौन जलायेगा,
पर पहले परवाना।।2।।
राम तूही धनश्याम तूही
देश के वीर जवान।
कंस असुर और रावण का
तू खोदे नाम निशान ।।
तेरे बल पर भारत
माता को पूर्ण आशा।
पापों का भर गया घड़ा
जल्दी कर इसे डुबा ।।3।।
जिसको समझा था अपना
वह निकला बेगाना।
सावधान ऐ शोभाराम
अब मत धोखे में आना।
ठोकर खाकर उठ जाना
भी बतलाया अच्छा।
सुबह का खोया शाम को पाया,
अब भी है मौका।।4।।










