छोड़ कर जग का, पसारा दो घड़ी

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छोड़ कर जग का

छोड़ कर जग का, पसारा दो घड़ी,
याद कर जगदीश, प्यारा दो घड़ी ॥
दम-बदम हरदम की, रखना जुस्तजू,
वक्त मत खोना, अकारथ दो घड़ी ।।

जग समुन्दर में थके, जब तैर कर,
ले लिया कर तू, सहारा दो घड़ी ॥
दो घड़ी में पापी, तन धुल जाएगा,
सच्चे दिल से जो, पुकारा दो घड़ी ॥

रात दिन खोया है, यूं ही वक्त को,
कौड़ी बदले तोड़ दी, मोती-लड़ी ।।
दो घड़ी यदि, नाम तू ने ले लिया,
हो गई तेरी सफल जीवन-घड़ी ॥

खुश रखो, खुश रहो। – आचार्य चन्द्रशेखर