आर्य समाज भजन

प्रभु भक्ति मे मन ने लगावो जी

प्रभु भक्ति मे मन ने लगावो जी प्रभु भक्ति में मन ने लगावो जी,वै सब रा पालन हार है।दुख दूर करेला...
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प्रभु कैसी अनोखी संसार है प्रभु कैसो अनोखो संसार है,कठे खुशियां कठे हा हाकार है। थांरी रचना रा मारा बापजी,कोई पायो नी...
कर लो ओम नाम री जाप कर लो ओ३म नाम रो जाप,भायों बोलो ने जी बोलो सा।वो सब को हि बाप,...
ओ३म् री महिमा तर्ज - काका पाटी बरतनो लादे रे. भायां ओम् ओम् नित बोलो रे-बोलो रे।जप लो ओम् नाम ने, पायो...
ईश्वर प्रार्थना "ओ३म् असतो मा सद्गमय,तमसो मा ज्योतिर्गमय,मृत्योर्मा अमृतं गमय ।।" - उपनिषद्तर्ज-आवो तो जावो म्हारा लाडकड़ा जमाई ओ…. सुणज्यो सायब म्हारी,...
इनसान बनूँ १.पढ़ लिख कर मैं इस दुनियाँ मेंबहुत बड़ा विद्वान् बनूँ। २. बनूँ वैद्य या डॉक्टर कोईवैज्ञानिक सांइसदान बनूँ । ३.प्रोफ़ेसर इंजिनियर...
गो हत्या बन्द करो (तर्ज-ओम् का झण्डा आया यह ओम का झण्डा आया) जागा भारत सारा अब जागा भारत सारा।समझा और विचारा...
सब से बड़ा रुपैया (तर्ज- मेरा यार बना है दूल्हा और फूल खिले हैं दिल के) यहाँ बाबा बड़ा न भैय्या सबसे...
पथिक भजन सर्वस्व (तर्ज - हरि हर समाया है हरयालियों में) बनाया है जिसने यह संसार सारा।वही एक सच्चा सखा है...
पथिक भजन सर्वस्व मन की उलझन कैसे मिटाऊँ (तर्ज - सारी उमरां दे पै गये विछोड़े) मन की उलझन मैं कैसे मिटाऊँ।कोई सुनता...
सामवेद का गान था सामवेद का गान था, मीठी वैदिक तान था।कहते लोग महामानव, किस मिट्टी का इन्सान था॥टेक॥ मुंशीराम नाम का...
तेरी ख़ातिर (तर्ज- मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तिहारे आऊँ) तेरी ख़ातिर परमपिता ने यह संसार बनाया।कुल दुनियाँ का वैभव सारा...
ओम् नाम का जाप करो जब चिन्ता बहुत सताये।तब ओम् नाम का जाप करो।दुःख अन्तःकरण दुखाये।तब ओम् नाम का जाप करो। १....
गीत प्रेम से गा न सका (तर्ज - दिल तोड़ने वाले जादूगर अब मैंने तुझे) भगवान् तुम्हारी महिमा के मैं गीत प्रेम...
सब का प्यारा बनाओ (तर्ज - दयानन्द के वीर सैनिक बनेंगे) दया भाव दिल में जगाओ प्रभु जी।हमें सब का प्यारा बनाओ...
जगतपति ने जगत् रचाया (तर्ज- जुत्ती कसूरी पैरों न पूरी हाये रबा वे मैनू टुरना पया) जगतपति ने जगत रचाया अन्त किसी...
कर मुझे भवसागर से पार (तर्ज - मन तड़पत हरि दर्शन को आज) प्रभु कर मुझे भवसागर से पार।हर दम तुम सब...
प्रभु जी मुझे वरदान दो (तंर्ज - है इसी में प्यार की आबरू) प्रभु जी मुझे वरदान दो मैं कभी न तुम...
संसार मुसाफ़िरख़ाना है (तर्ज-है प्रीत जहाँ की रीत सदा मैं गीत…..) संसार मुसाफ़िरखाना है इसका दस्तूर पुराना है।इक रोज़ यहाँ पर...
भगवान् जैसा कोई नहीं (तर्ज - औलाद वालो फूलो फलो) शेअर - भर दे सब की झोलियाँ वह प्रजापति भगवान ।उसी के...
पाँच सकार (सन्ध्या, स्वाध्याय, सत्संग, संयम, सेवा) (तर्ज-बच्चो तुम तसवीर हो कल के हिन्दुस्तान की) भवसागर में डोलती नैया के पतवार हैं।जीवन...
वक्त की कदर करो (तर्ज-कव्वाली) वक्त की कदर करो वीरवरो।वक्त की कदर करो।झोलियाँ सुख से भरो वीरवरो।वक्त की कदर करो। १. वक्त जो...
पुरुषार्थी बनो (तर्ज-तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा…) जो ज़िन्दगी पुरुषार्थ के साँचे में ढली है।तूफान का मुँह मोड़ के रख दे...
इनसान (तर्ज-बहारो फूल बरसाओ) किसी के काम जो आए उसे इनसान कहते हैं।पराया दर्द अपनाए उसे इनसान कहते हैं।किसी के काम जो...
कब जीना आएगा जीने को तू नई से नई चीज़ बनाएगा।दुनियाँ में इनसान तुझे कब जीना आएगा।दुनियाँ में इनसान तुझे…….. १. माना...
छोड़ दो (तर्ज-है बहारे बागे दुनियाँ चन्द रोज़) दीन दुःखियों को सताना छोड़ दो छोड़ दो।दिल जलों के दिल जलाना छोड़ दो...
पहचान लिया है दुनियाँ की हकीकत को हमने जान लिया है।मतलब के सभी लोग हैं पहचान लिया है। १. हमदर्द यहाँ कौन...
क्या जाने (तर्ज-आँखों में खुशी छा जाती है) बातें जो बनाया करते हैंवो करके दिखाना क्या जानें।करने की लगन जिनके मन मेंवो...
धन से प्रीति (तर्ज - ऐ जाने चमन तेरा गोरा बदन) रहने को भवन वस्तर भोजन सुख धन से मिलें हज़ार ।क्यों...
अनमोल जीवन तेरा जीवन है अनमोल रे तेरा जीवन है अनमोल।इसे विषयों में न रोल रे तेरा जीवन है अनमोल। १. कभी...
शराब की नदियाँ चार मुक्तक (रुबाईयाँ) १. हालत हमारे देश की जिसने ख़राब की।ऐसी ख़राब की है कि बस बेहिसाब की।बहती थीं...
मन का दीया (तर्ज-या ख़ुदा सोई किस्मत जगा दे) ज़िन्दगी का सफ़र करने वाले ।अपने मन का दीया तो जला ले। १. वक्त...
कमाई देख ले (तर्ज-कैसे कैसे यह जलवे दिखाए रामजी) तूने कर ली है कितनी कमाई देख ले।हुआ फ़ायदा या घाटा ओ भाई...
इक दीया जलता हुआ लाखों जलाएगा। (तर्ज-या मेरी मन्जिल बता या ज़िन्दगी को छीन ले) इक दीया जलता हुआ लाखों जलाएगा।पर बुझे...
हीरा जीवन है अनमोल (तर्ज-तेरे पूजन को भगवान बना मन मन्दिर आलीशान) हीरा जीवन है अनमोल इसे यों मिट्टी में न...
दुनियाँ की हालत (तर्ज-मयखाना तो छूट गया दर छूटे न मयख़ाने का) क्या कहूँ दुनियाँ की हालत लग गई बीमारी है।उड़ चली...
पहले तोलो फिर बोलो (तर्ज - हाय न वस ओये न वस बदला अजे न वस ओये कालेया) पहले अपनी बात को...
सब खा गये मिर्च मसाला (तर्ज-ओम् का झण्डा आया) अजगर बन कर लाला। सब खा गये मिर्च मसाला।कर गड़बड़ घोटाला। सब खा...
कर ओम् नाम का जाप (तर्ज- बुरा जो देखन मैं चला) १. कर्मशील इनसान कर ओम् नाम का जाप।ओम् नाम के जाप...
जिसकी तलाश है (तर्ज-तुझे क्या सुनाऊँ ऐ दिलरुबा…) तुझे मनवा जिसकी तलाश है।अति निकट उसका निवास है।काहे दर बदर तू भटक रहावह...
नेकियाँ कमाना (तर्ज - दिल का खिलौना हाये टूट गया) नेकियाँ कमाना काहे छोड़ दिया।बुरी आदतों से नाता जोड़ दिया।नेकियाँ कमाना काहे……….. १....
सारा जीवन बीत गया (तर्ज - मेरी छम छम बाजे पायलिया) तेरा जीवन सारा बीत गया।तुम से मनाया नहीं मीत गया।तेरा जीवन...
अमृत पिया करो (तर्ज - जोगी हम तो लुट गये तेरे प्यार में) लिया करो उस प्रभु का नाम हर दम लिया...
तेरी लाठी बे आवाज़ है भक्त जनों का रखवाला भगवान् गरीब नवाज़ है।सारी दुनियाँ मान गई तेरी लाठी बे आवाज़ है। १....
हम को शक्ति दो (तर्ज-टुट्टे दिल नहीं जुड़दे वेखीं तोड़ीं ना) हे दुनियाँ के दाता हम को शक्ति दो।जगत् पिता जग माता...
सब का दाता एक है (तर्ज - सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है) अनगिनत प्राणी जगत् में सब का दाता...
सुबह शाम सन्ध्या सुबह शाम ईश्वर को ध्याया करो जी।कि सन्ध्या में मन को लगाया करो जी। उठो ब्रह्म वेला में निद्रा...
उमर चली जाये न (तर्ज-कभी राम बन के कभी शाम बन के चले आना) प्रभु नाम जप ले सुबह शाम जप लेयूँ...
प्रभु के गुणगान (तर्ज-खिलौना जानकर मुझ को मेरा दिल तोड़े जाते हो) तुम्हारे दर पे ही योगी मुनि सब सर झुकाते हैं।तुम्हीं...
तेरी शरण में (कर्ज-कन्हैया कन्हैया तुझे आना पड़ेगा) दिलों में सभी प्यार लाये हुए हैं।शरण में तेरी नाथ आए हुए हैं। १. उठी...
प्रभु का सहारा (तर्ज - दयानन्द के वीर सैनिक बनेंगे) प्रभु के बराबर सहारा नहीं है।हितु और कोई हमारा नहीं है।प्रभु के...
ओम् का झण्डा आया ओम् का झण्डा आयायह ओम् का झण्डा आया। ९. ऋषि ने लाखों कष्ट उठाये।जहर पिया और पत्थर खाये।फिर...
सृष्टि तथा वेद की उत्पत्ति (तर्ज- हे दयामय हम सबों को शुद्धताई दीजिये) १. प्राकृतिक परमाणुओं की मूल सामग्री जुटी।स्वयंभू परमात्मा ने...
यस्त॑ इ॒ध्मं ज॒भर॑त्सिष्विदानो मूर्धानं वा तृतर्पते त्वाया। भवस्तस्य स्वतवाँः पायुरग्ने विश्वस्मात्सीमुघायत उरुष्य ॥ ऋः ४.२.६ तर्जः मोली मोली कातिरुन्दर गणी कोरमग-राग-भूपाली...
विष्णोर्नु क॑ वी॒र्याणि प्र वर्वोचं यः पार्थिवानि विमुमे रजांसि । यो अस्क॑भाय्युत्तरं स॒धस्य॑ स॒धस्य॑ विचक्रमा॒णस्त्रेधोरु॑णा॒यः ॥ ऋः १.२२.१६ तर्जः मोली मोली कातिरुन्दर...
असृक्षत॒ प्र वा॒जिनौ गुव्या सोमा॑सो अश्व॒या। शुक्रासौ वीर्याशवः ।। ऋः ६.६४.४ तर्जः मैत्रीनो अजुनका वाणी में जादू तो सन्त जगायेगा, अपने तक नहीं...
अ॒यं द्यावा॑पृथि॒वी वि ष्कंभायद॒यं रर्थमयुनक्स॒प्तर॑श्मिम् । अ॒यं गोषु शच्या प॒क्म॒न्तः सोमो दाधार् दशयन्त्रमुत्स॑म् ।। ऋः ६.४४.२४ तर्जः मैं तो साँवरे के...
मूर्धा दि॒िवो नाभि॑िरा॒ग्निः पृथिव्या अर्घाभवद्ररती रोद॑स्योः । त्वं त्वां देवासौ ऽजनयन्त दे॒वं वैश्वानर॒ ज्योति॒रिदार्याय। । ऋः १. ५६.२ तर्जः मैं तो इक...
ते घेद॑ग्ने स्वा॒ध्योऽहा विश्वा नृचक्षसः । तर॑न्तः स्याम दुर्गहा। । ऋ. ८.४३.३० तर्जः मैं केवल तुम्हारे लिए गा रही हूँ तुम्हारे बताये ही...
समानी व कूतिः समाना हृदयानि वः। समानम॑स्तु वो मनो या वः सुसुहास॑ति । ऋः १०. १६१.४ तर्जः मेले विन्निन मुत्ततारी-943/2453 राग-देस ऐ...
समानो मन्त्रः समितिः समानी समानं मनः सह चित्तमे॑षाम् । समानं मन्त्रभि मन्त्रये वः समानेन वो हविषा जुहोमि ॥ ऋः १०.१६१.३ तर्जः...
सं गच्छध्वं सं व॑दध्व॒ सं वो मनांसि जानताम् । दे॒वा भागं यथा पूर्व संज्ञानाना उपासते । ऋः १०. १८१.२ तर्जः मेले...
३२३१ २३१ २२ २३१२३१२३१२३२ शृण्वो वृष्टेरिव स्वनः पवमानस्य शुष्मिणः। चरन्ति विद्युतो दिवि। साम. ८६४ तर्जः मेजवाने पाँदळे ओढ्या माधव तमे साधक की...
य॒मस्य॑ लोकादध्या व॑भूविय॒ प्रम॑दा मया॒न्द्र युनक्षि धीर॑ः । एकाकिनना॑ स॒रथं यासि वि॒िद्वान्स्वप्नं मिमा॑नो असुरस्य॒ योनौं ।॥ अथ. १६. ५६.१ तर्जः मेघालय...
आ पवस्य दिशां पत आर्जाकात् सौम मीङ्कः । ऋत॒वा॒केन॑ स॒त्येन॑ श्रृद्धया॒ तप॑सा सुत इन्द्रायन्द्रो परिं स्रव ऋः ६.११३.२ तर्जः मुटुवा...
यत्र ज्योतिरजस्त्रं यस्मिंल्लोके स्वर्हितम् तस्मिन्मां देहि पवमानामृते लोके अक्षित इन्द्रायेन्दो परिस्रव।। ऋः ६.११३.७ तर्जः मृदुवा गवेतु कवि मिदवा आत्मा को दर्शन...
त्वं सौमासि सत्प॑ति॒स्त्वं राजोत वृत्रहा। त्वं भुद्रो अ॑सि क्रतुंः ॥ ऋः १.६१.५ तर्जः मुटुमन्द हासम मलमलियाति हे सोम सितान्शु, है जनक तू...
समीचीनार्स आसते॒ होता॑रः सुप्तामयः । प॒दमेक॑स्य॒ पिप्र॑तः॥ ऋः ८.१०.७ तर्जः मूर्तिमन्त भगवन्त भटेला ज्योति इन्द्रियाँ, इन्द्र देवता॥ भजन ये जो इन्द्रियाँ हैं करें...
वाममुद्य संवितर्वाममु श्वो द्विवेद॑िवे वा॒मम॒स्मभ्यं सावीः । वामस्य हि क्षय॑स्य देव॒ भूरि॑रया धिया वामभार्जः स्याम तर्जः मूर्ति अशी साजरी ग...
किमार्ग आम वरुण ज्योष्ठं यत् स्तो॒तार॒ जियाँ मसि सखायाम् । प्र तन्में वोचो दूळभ स्वधावो ऽवं त्वानेना नमसा तुर ईयाम्।।...
१२३१ २ ३१ २३२ ३२ २१ १२ ३२१ इन्दुः पविष्ट चेतनः प्रियः कवीनां मतिः। सृजदश्वः रथीरिव ।। ऋग. ६.१६४.१० साम. ४८१ तर्जः...
त्वं तमग्ने अमृतत्व उत्तमे मर्त दधासि श्रवसे दिवेदिवे । यस्तातृषाण उभयाय जन्मने मयः कृणोषि प्रय आ च सूरये ॥७॥ ऋः...
प्रसुस्तोमं भरत वाजयन्तं इन्द्राय सत्यं यदि सत्यमस्ति नेन्द्रौ अस्तीति नेम उत्व आहं कई ददर्श कमभिष्ट वाम ॥3॥ अयमस्मि जरितः पश्य...
त्वं विश्वस्य मेधिर दिवश्च ग्मश्च राजसि । स यामनि प्रति श्रुधि ॥२० ऋः १. २५.२० तर्जः मुळिगलुम मौनम गणम सत्यवचन वाचाल...
मम त्वा सूर उदिते मम मर्ध्यान्दने दिव्यः । मम प्रपित्वे अपिशवरे वसवा स्तोमासो अवृत्सत ॥ ऋः ८.१.२६ तर्जः मुंजई कुटुमवालुम कुटुम...
आ पप्रो पार्थिव रजो वद्वघे रोचना दिवि। न त्वावाँ इन्द्र कश्चन न जातो न जनिष्यतेऽ विश्व ववक्षिय ।। ऋः १.८१.५ तर्जः मुक्या...
प्र वयो॑ मि॒त्राय॑ गायत॒ वरु॑णाय वि॒पा गिरा। मह॑िक्षत्रावृतं वृहत् ॥ ऋः ५.६८.१ साम. ११४३ तर्जः मी ही अशी भोळी कशी ग गीत...
यम॑ग्ने॒ मन्य॑से र॒यिं सह॑सावन्नमर्त्य तमा नो वाज॑सातये॒ वि वो मद॑ य॒ज्ञेषु चित्रमा भ॑रा विव॑क्षसे।। ऋः १०.२१.४ तर्जः मीरा बाई कातर वेड़ी हे...
सक्तुमिव तित॑उना पुनन्तो॒ यत्र धीरा॒ मन॑सा॒ वाच॒मव॑त । अत्रा सखायः सुख्यानिं जानते भ॒द्रेष लक्ष्मीर्निहिताधि॑ि वा॒चि।॥ ऋ. १०.७१.२ तर्जः मी बाळ असा...
युत्किं च॒दं व॑रुण दैव्ये॒ जन॑ऽभिद्रोहं मनुष्याई भरांमसि । अर्चित्ती यत्तव॒ धर्मायुयोप॒म मा न॒स्तस्मा॒देन॑सो देव रीरिषः ॥ अथ. ६.५१.३ तर्जः मी...
मा त्वा सोम॑स्य॒ गल्द॑या॒ सदा याच॑न्न॒हं ग्रा। भृर्णि मृगं न सर्वनेषु चुक्रुधं क ईशानं न याचिपत ।। ऋः ८.१.२० तर्जः...
दृते दृहं मा।ज्योक्ते सुन्दृर्शि जीव्यासं ज्योक्तै सन्दृर्शि जीव्यासम् ॥ यजु. ३६/१६ तर्जः माविन चोटिले मळ्मुळले मधुरमाय-086/214 राग मिश्र खमाज भाजन बन...
१ २ ३२३ १२३१ २ ३१२ २उ ३ १२ शं नो देवीरभिष्टये शं नो भवन्तु पीतये। शं योरभि स्रवन्तु नः...
स नः पप्रिः पारयाति स्वस्ति नावा पुरुहूतः। इन्द्रो विश्वा अति द्विषः ॥ ऋः ८.१६.११ तर्जः मिड़ीतुम्मिल पुणरुम्न नेरम परयादे अरियुम अनुरागम तरणी...
कन॑िक्रन्ति हरिरा सृज्यमानः सीद॒न्वन॑स्य जुठरै पुना॒नः । नृर्भिर्युतः कृणुते निर्णजूं गा अततो॑ म॒तीर्ज नयत स्व॒धार्भिः ।। साम. ५३० ऋ. ६.८५.१ तर्जः...
रथाय नावमुत नो गृहाय नित्यारित्रां पद्धती रास्यग्ने । अस्माकं वीरौं उत नो मघोनो जनाँश्च या पारयाच्छर्म या च। । ऋः १....
तू कर ले प्रीति ओम् से ओ अभिमानी बन्दे ! तू कर ले प्रीति ओम् से।तज कर झूठे धंधे ! तू...
तेरे मन्दिर में आया करूँ (तर्ज- तुम अगर साथ देने का वादा करो) मैं तेरे प्रेम की धुन में गाता हुआजब कभी...
सहारा मिल गया जिस को प्रभु के नाम का जग में सहारा मिल गया।उस नाव को मंझधार में समझो किनारा मिल...
कर्म खोटे तो ईश्वर के भजन गाने से क्या होगा। (तर्ज- हमारी याद जब आये तो आंसू बहा लेना) कर्म खोटे तो...
सबके पालनहार हो प्रभु जी। सबके पालनहार हो प्रभु जी।जन जन के दातार हो प्रभु जी।सब के पालनहार हो प्रभु जी……… अन्तर्यामी...
ग़रीबों की पुकार (तर्ज-जान सके तो जान) कर मुश्किल आसान।सूख रही है जीवन खेतीदेख जरा भगवान् ।कर मुश्किल आसान….. १. ऐ विधाता जग...
प्रभु याद रहे (तर्ज-चले जा चले जा चले जा जहाँ प्यार मिले) भूले न भूले न भूले न प्रभु याद रहे।भूले न...
तू पिता तू ही माता (तर्ज- ऐ मेरे प्यारे वतन ऐ मेरे बिछड़े चमन) तू पिता और तू ही माता तू सखा,तू...
दुनियाँ का वाली (तर्ज-चली मेरी दुल्हन की डोली) प्रभु तू है दुनियाँ का वाली।झूम के डाली डालीगाती है कोयल काली।प्रभू तू है………. १....
सब का मालिक (तर्ज- यह सारी दुनियाँ है आनी जानी तो) सब का तू मालिक जग का भण्डारी।सारा जमाना तेरा पुजारी है।सब...
ओ३म् भज मेरे मन (तर्ज-बात इतनी सी है कह दो कोई दीवानों से) तोड़ कर दुनियाँ के बन्धन प्रभु दीवाना बन।ओ३म् भज...
सफल ज़िंदगी (तर्ज- रात दिन गुरु के गीत गाए जा) जो भी उस प्रभु के गीत गाएगा।ज़िन्दगी सफल वही बनाएगा। १. क्योंकि वह...
प्रार्थना - हे प्रभो वर दीजिए धारण करें सन्तोष हम। (तर्ज-यज्ञरूप प्रभो हमारे भाव उज्वल कीजिए) हे प्रभो वर दीजिए धारण...
हृद॒िस्पृश॑स्त आसते विश्व षु सोम् धार्मसु। अधा कामा॑ इ॒मे मम॒ वि वो मदे॒ वि तिष्ठन्ते वसूयवो विव॑क्षसे। । ऋः १०.२५.२ तर्जः...