बिक्रीकद्र
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मातृभाषा को मात्र भाषा ना समझें.नहीं तो मातृभाषा को मृत भाषा बनने से कोई नहीं रोक सकता.
“ओ३म् नाम का अमृत सोम घोले चित्त रोम रोम”एक ईश्वर प्रणिधान गीत
“आनन्दरूप भगवन् किस भाँति तुमको पाऊँ”एक उत्तम भजन
तुम भूलना सब कुछ मगर, माँ-बाप को मत भूलना।
उपनिषद् दर्शन योग साधना शिविर:
51वां वार्षिकोत्सव समारोह, सहारनपुर, उत्तरप्रदेश
“वन में रहकर वेद पढ़े,और प्राणी मात्र से प्यार करे”
आर्य समाज का 150वां स्थापना समारोह – एक भव्य आयोजन
त्वमेव माता च पिता त्वमेव
गलत आदतों को छोड़ना :













