भिद्यते हृदयग्रन्थिश्छिद्यन्ते सर्वसंशयाः

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भिद्यते हृदयग्रन्थिश्छिद्यन्ते सर्वसंशयाः

भिद्यते हृदयग्रन्थिश्छिद्यन्ते सर्वसंशयाः।
क्षीयन्ते चास्य कर्माणि तस्मिन्दृष्टे परावरे।। (मुण्डकोपनिषद् २-१-१८)

भावार्थ- ईश्वर का साक्षात्कार होने पर आत्मा की अविद्या नष्ट हो जाती है। सारे संशय मिट जाते हैं और सारे कुसंस्कारों का नाश हो जाता है। दूसरे शब्दों में हृदय की गाँठ खुल जाती है और सारे संदेह मिट जाते हैं। जब वह उच्च और निम्न लोकों में दिखाई देता है, तो उसके कर्म नष्ट हो जाते हैं।