गीत प्रेम से गा न सका
(तर्ज – दिल तोड़ने वाले जादूगर अब मैंने तुझे)
भगवान् तुम्हारी महिमा के मैं गीत प्रेम से गा न सका।
तुमने तो दिये अवसर कितने पर मैं ही लाभ उठा न सका।
भगवान् तुम्हारी महिमा के…….
१. मैं अपनी लापरवाही से अज्ञान अन्धेरों में भटका
सब साधन थे मौजूद मगर सज्ञान का दीप जला न सका।
भगवान् तुम्हारी महिमा के………
२. इतने उपहार दिये तुमने जिनको मैं गिना भी नहीं सकता
अफ़सोस फटी झोली मेरी सब पाकर भी कुछ पा न सका।
भगवान् तुम्हारी महिमा के……..
३. जीवन की उजली चादर को हर रोज़ अनेकों दाग लगे
भगवान भजन के साबुन से चादर के दाग मिटा न सका।
भगवान् तुम्हारी महिमा के………
४. सदियों से प्यासा चातक हूँ इक बूँद की ख़ातिर तरस रहा
तुम बादल बनकर बरस गये फिर भी मैं प्यास बुझा न सका।
भगवान् तुम्हारी महिमा के……..
५. विषयों के गहरे सागर में पैरों से सर तक डूब गया
इतना डूबा इतना डूबा जल्दी फिर बाहर आ न सका।
भगवान् तुम्हारी महिमा के………
६. जब तीर कमां से निकल गया क्या लाभ ‘पथिक’ पछताने से
तप त्याग तपस्या के द्वारा बिगडी तकदीर बना न सका।
भगवान् तुम्हारी महिमा के……….










