भगवद् भजन की ज्योति

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भगवद् भजन की ज्योति

भगवद् भजन की ज्योति,
हृदय में तू जगा ले।
दुनियां की उलझनों से,
मन को जरा हटा ले।।

हासिल यदि है करना,
भगवान का सखापन।
बन आप पहले उसका,
अपना उसे बना ले ।।

अभ्यास करते करते,
धो आत्मा के मल को।
सागर आनन्द के में,
जी भर के फिर नहा ले।।

बातों से काम पूरा,
कोई कभी न होता।
वाणी से जो कहा है,
करके उसे दिखाले ।।

वेदों के ज्ञान द्वारा,
दीदार कर प्रभु का।
दुई का भाव दिल से,
अपने जरा हटाले ।।

ये तो नगद का सौदा,
ए देश जान लेना।
इस हाथ से तू घर दे,
उस हाथ से उठाले ।।

उलझने की बजाय सुलझना सीखो।
क्योंकि उलझना आसान है, सुलझना कठिन है। – आचार्य चन्द्रशेखर