बाप अपनी कमाई में
बाप अपनी कमाई में
से थोड़ा सा भी भाग,
प्राण प्यारे पुत्र को
लताड़कर देता है।
पति अपनी पत्नी को प्रेम भरी,
बगिया उजाड़कर देता है।
स्वामी निज सेवक को
वेतन महीने पर,
देता है तो हुलिया
बिगाड़कर देता है।
किन्तु भगवान् बिन
मांगे सुख सम्पदा,
देता है ‘प्रकाश’ तो
छप्पर फाड़कर देता है।।










