बनो आर्य वेद मत पर चलो
बनो आर्य वेद मत पर चलो,
रहो बे धड़क मत किसी से डरो।
अविद्या करो नाश विद्या पढ़ो,
परम दान विद्या का दो और लो
चलन वेद अनुकूल अपना करो,
ख़ुशी से रहो और फूलो फलो।
करो योग और योगियों से मिलो,
परमधाम मुक्ति के भागी, बनो।
परोपकार में ही लगा रक्खो मन,
परोपकार करके हो मन में मगन।
न हो वैर बुद्धि किसी से कभी,
रहे मन में व्यापक सदा शान्ति ।
हृदय में खुलें ज्ञान चक्षु अगर,
तो प्रकाश उस का हो नूर नज़र।
बदी से डरो और करो काम नेक,
कि नेकों का होता है अंजाम नेक ।
जो रहना है मंजूर आराम से,
तो भागो हमेशा बुरे काम से।
जिन्हें एक ईश्वर का है आसरा,
नहीं उन को डर है कहीं भी ज़रा।
वह नेकों की नेकी का फल देता है,
बुरों को सज़ाए अमल देता है।
वही विश्व का “केवल” आधार है,
उसी को हमारा नमस्कार है।










