बलिदान दिवस – धर्मवीर हकीकत राय’

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बलिदान दिवस – धर्मवीर हकीकत राय

‘बलिदान दिवस – धर्मवीर हकीकत राय’

(हिन्दू परिवार में जन्में, उस वीर बालक की कहानी, जिसने अपना शीश कटवा दिया, लेकिन अपना धर्म परिवर्तन नहीं किया। कृपया आप एक बार अवश्य पढ़े और अपने बच्चों को भी अवश्य बताएं)

देश की भावी संतानों में आर्य चेतना, धर्म-अनुराग, आत्म-गौरव एवं सच्ची राष्ट्रीय भक्ति उत्पन्न करने में, भारत के महान पुरुषों की जीवनियाँ, जो कार्य कर सकती हैं, अन्य कोई साधन नहीं कर सकता। धर्म पर मर मिटने के लिए तो बहुत हुए, परंतु धर्म की खातिर मर कर भी जीवित रहा, तो वह 14 वर्षीय ‘धर्मवीर हकीकत राय’ का अमर बलिदान ।

पंजाब की पावन धरती पर, सन 1719 में भागमल खत्री के घर जननी माता कौरा की पवित्र कोख से, तेजस्वी वीर बालक हकीकत राय का जन्म हुआ। उस समय मुगलों का शासन था। तलवार के बल पर, मृत्यु का भय दिखाकर बलात हिंदुओं का धर्म परिवर्तन किया जाता था। अन्याय तथा अत्याचार का बोलबाला था तथा हिंदू जनता इन अत्याचारों से थर-थर कांप रही थी। निर्दोषों के गले नित्य नए उगते सूर्य के साथ काटे जा रहे थे। ऐसी भयंकर बेला में पंजाब के 14 वर्षीय निडर बालक ‘वीर हकीकत राय’ अत्याचार के विरुद्ध सीना तानकर खड़ा हुआ था।

उस समय मुगलों का शासन होने के कारण फारसी राज्य की भाषा थी तथा इस कारण माता-पिता ने उसका नाम हकीकत राय रख दिया। हकीकत का अर्थ सच्चाई होता है और ऐसा प्रतीत होता है कि होनहार बालक भी माता के गर्भ से सच्चाई की भावना लेकर पैदा हुआ। इकलौती संतान होने के कारण माता-पिता ने पुत्र को बड़े लाड-प्यार से पाला।

बचपन से ही हकीकत राय मेधावी तथा प्रतिभाशाली बालक था। सरकारी भाषा फारसी होने के कारण, फारसी का जानना अत्यंत आवश्यक था। इस विचार से माता-पिता ने फारसी की शिक्षा के लिए उसे मकतब (विद्यालय) में मौलवी के पास भेजा। प्रतिभाशाली होने के कारण थोड़े ही समय में वह अपने सहपाठियों से पढ़ाई में आगे निकल गया और परीक्षा में सर्वप्रथम रहकर पुरस्कार भी प्राप्त करता था। जिसके कारण सहपाठी उससे ईष्या करते थे। एक दिन मौलवी ने एक मुसलमान विद्यार्थी को पाठ सुनाने के लिए कहा, तो वह अपना पाठ न सुना सका। जिस पर मौलवी ने डांटते हुए कहा कि तुझ से से तो वह हिंदू लड़का ही अच्छा है, जो अपना पाठ सरलता से सुना देता है और तू मुसलमान होकर भी अपनी भाषा का पाठ नहीं सुना सकता।

अपमानजनक शब्द सुनकर वह विद्यार्थी पानी-पानी हो गया और उसने हकीकत राय से बदला लेने तथा तंग करने की योजना बनाई। मौलवी नमाज पढ़ने के लिए निकट की मस्जिद में गया था और उसकी गैर हाजिरी में वह विद्यार्थी व उसके अन्य साथी हकीकत राय को तंग करने लगे तथा भिन्न-भिन्न अभद्र व्यंग्य करने लगे। इस पर हकीकत राय बोला मित्रों तुम्हें मां भगवती का वास्ता, मुझे तंग मत करो। परंतु उन्होंने भगवती का नाम सुनते ही, भगवती को ही बुरा-भला कहना शुरू कर दिया और साथ में हकीकत राय से मारपीट भी शुरू कर दी।

तंग आकर आकर हकीकत राय ने कहा कि अगर यही शब्द में आपकी ‘बीवी फातमा’ के प्रति कहूं तो क्या आपको दुख नहीं होगा ? उन्होंने कहा कि तू कह कर तो देख। तो फिर क्या था, मानों कयामत (प्रलय) आ गई तथा उन सभी लड़कों ने खूब नमक-मिर्च लगाकर मौलवी से हकीकत राय की शिकायत की। हकीकत राय को इस आरोप में गिरफ्तार करवा दिया गया और मामला हाकिम मिर्जा बेग की अदालत में भेज दिया गया।