आर्यो जागो करो कुछ वक्त सोने का नहीं है
आर्यो जागो करो कुछ
वक्त सोने का नहीं है
वक्त है यह कीमती,
बेकार खोने का नहीं है
हो गये बलिदान जो निज
देश धर्म के हितार्थ
लाश पर उनकी ऐ बन्धुओ,
वक्त रोने का नहीं है।।1।।
पहला ही है कदम यह,
मंजिल अभी बड़ी दूर है
अपने पथ से आज विचलित,
वक्त होने का नहीं है।।2।।
काम करो निस्वार्थ कुछ,
इच्छा न रखो मान की
वक्त तकिये गद्दे मखमल के
बिछौने का नहीं है।।3।।
शोभाराम प्रेमी उठो,
अनथक परिश्रम के लिये
वक्त यह श्रृंगार के लिए,
नहाने धोने का नहीं है।।4।।










