आराम के साथी क्या-क्या थे
आराम के साथी क्या-क्या थे
जब वक्त पड़ा तब कोई नहीं।
सब दोस्त हैं अपने मतलब के
दुनिया में किसी का कोई नहीं।
कल बाग जो था
फूलों से भरा,
इठलाती हुई चलती थी हवा।
ऐ बन्दे ये बेकार हैं सब
मिट्टी का भरोसा कोई नहीं।
जब पैसा पास हमारे था,
तब दोस्त हमारे लाखों थे।
जब वक्त पड़ा था मुश्किल में
तब पूछने वाला कोई नहीं।
मां बाप पिया और पुत्र-वधू
सब ही मतलब के नाते हैं।
जब चाहने वाले लाखों थे
अब रोने वाला कोई नहीं।










