आँखें बन्द करूं या खोलूं, मुझको दर्शन दे देना

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दर्शन दे देना

आँखें बन्द करूं या खोलूं,
मुझको दर्शन दे देना
दर्शन दे देना, प्रभु जी मुझे दर्शन दे देना

मैं नाचीज हूँ बन्दा तेरा,
तू सबका दाता है,
तेरे हाथ में सारी दुनियां
मेरे हाथ में क्या है,
देखूं जिसमें केवल तुझको
वो दर्पण दे देना
आँखें बन्द करूं……..

मेरे अन्दर लहरें ऐसी,
रिश्ता है सदियों का,
जैसे इक नाता होता है
सागर से नदियों का,
करूं मैं साधना तेरी वो
साधन दे देना-2
आँखें बन्द करूं……..

हम हैं सेवादार तुम्हारे,
हम सब हैं दास तुम्हारे,
जीवन के दिन कट जाएंगे,
दाता तेरे सहारे,
इक पल भी तेरा नाम न विसरूं,
वो धड़कन दे देना
आँखें बन्द करूं………

मेरी मांग है बड़ी साधारण,
दिल में आते रहियो,
हरेक श्वांस के पीछे,
अपनी झलक दिखाते रहियो,
मेरे तार के अन्दर दाता,
सिमरन भर देना
आँखें बन्द करूं……..

पहले नमस्ते परमपिता को जिन्होंने सृष्टि रचाया है।
दूजे नमस्ते मात-पिता को जिन्होंने गोद खिलाया है।
तीजे नमस्ते प्यारे ऋषि को वेदों का ज्ञान कराया है।
चौथे नमस्ते उन वीरों को जिन्होंने देश बचाया है।
पांचवे नमस्ते आप सभी को आपका दर्शन हो पाया है।