ऐजी हेजी देश के बिगड़ गए हालात ।
ऐजी हेजी देश के बिगड़
गए हालात ।
आपस के म्हा फूट
पड़ी है बनी से कड़ी जात ।
प्रजातन्त्र राज हो गया
बदमाशों की मौज होगी।
भले मानस तो रहे नहीं
गुण्डों की फौज होगी।
जातिवाद फैल गया
गीता की भी खोज होगी।
गुण्डागर्दी देश अन्दर
रोज-रोज-रोज होगी।
रिश्वत लेने वालों की
भी गर्मागर्म गोज होगी।
करते हैं मतलब से बात,
देश के बिगड़ गए हालात ।।
उन्नीस सौ अस्सी के में
जब देश अन्दर वोट पड़े।
बड़े-बड़े नेता लोग एम. पी.
का चुनाव लड़े।
जाति के हिसाब से ही
लोगों अन्दर बणगे धड़े।
एक दूसरे को मारण
खातर सारे होगे खड़े।
जनता का तो कहना
क्या है डूबे लीडर बड़े-बड़े।
हों जाति पर उत्पात,
देश के बिगड़ गए हालात ।।
कोई गूजर कोई अहीर
कोई है सुनार यहां।
कोई तेली कोई धोबी
कोई है मनिहार यहां।










