ऐश्वर्यवान् ईश्वर, ना साथ तेरा छोड़ूँ
ऐश्वर्यवान् ईश्वर
ना साथ तेरा छोड़ूँ
कोई लाख-कोटी धन दे
निज मुख ना तुझसे मोड़ूँ
ऐश्वर्यवान् ईश्वर
रत्नों से भर के पृथ्वी
या दे सुवर्ण-चाँदी
ऐश्वर्य-धन भरा जग
तेरी चरण-रज से कम ही
मिले शरण तव प्रभुजी
सन्सार क्यों टटोलूँ ?
कोई लाख-कोटी धन दे
निज मुख ना तुझसे मोड़ूँ
ऐश्वर्यवान् ईश्वर
है व्यर्थ भोग-साधन
यदि पाके तुझको भूलूँ
इससे तो बेहतर है
मैं हज़ार कष्ट झेलूँ
दु:ख, कष्ट, यातना हो
पर मन में तुझसे जोड़ूँ
कोई लाख-कोटी धन दे
निज मुख ना तुझसे मोड़ूँ
ऐश्वर्यवान् ईश्वर
अनमोल कितना तू है
यह वाणी कैसे बोले
ऐश्वर्य-महिमा अगणित
मन-क्षुद्र कैसे तोले ?
बदले में तेरे ईश्वर
कभी स्वार्थ का ना होलूँ
कोई लाख-कोटी धन दे
निज मुख ना तुझसे मोड़ूँ
ऐश्वर्यवान् ईश्वर
ना सत्य नियम तोड़ूँ
अज्ञानता को छोड़ूँ
ना डरूँ मैं मृत्यु-भय से
ना भोग पीछे दौड़ूँ
माटी के इस जीवन में
तेरे प्रेम बीज बो लूँ
कोई लाख-कोटी धन दे
निज मुख ना तुझसे मोड़ूँ
ऐश्वर्यवान् ईश्वर
ना साथ तेरा छोड़ूँ
कोई लाख-कोटी धन दे
निज मुख ना तुझसे मोड़ूँ
ऐश्वर्यवान् ईश्वर










