ऐ स्वामी दयानन्द, तूने कर दिया कमाल।
ऐ स्वामी दयानन्द,
तूने कर दिया कमाल।
निर्जीव आर्य जाति में,
फिर प्राण दिये डाल ।।
अज्ञान अँधेरा था,
चारों ओर ही छाया।
पापी पाखण्डियों ने था,
अँधेर मचाया।।
देकर सन्देश वेद का,
हमको किया निहाल।।
ऐ स्वामी दयानन्द तूने…..
विधवा अनाथ और,
अछूतों को बचाया।
शुद्धि का चक्र लाके,
तूने ऐसा चलाया।।
लाखों ही लाल जाति के,
गिरते लिये सँभाल ।।
ऐ स्वामी दयानन्द तूने…..
‘नन्दलाल’ आने वाला,
समय ही बतायेगा।
जब सारा विश्व वेद का,
नारा लगायेगा।।
वेदों की शिक्षा रोक सके,
ये किसकी है मजाल ।।
ऐ स्वामी दयानन्द तूने……….
“दुनिया को अपना सर्वश्रेष्ठ दीजिए और आपके पास सर्वश्रेष्ठ लौटकर आयेगा।” – ऋषि दयानन्द










